मननीय (अवधी )
मननीय (अवधी ) | Ajay Pandey Nepal

मननीय (अवधी )

देश कय अवस्था एकदम दयनीय होइगय

कल कय गुन्डा जब से मननीय होइगय

पढाल लिखल देखो सब भैँस चरवय

अव बिन पढ़ा सब कै सम्मनीय होइगय

जीवन  भर  अपराध  किहिस जउन

आज उहय सबसे पुजनीय होइगय

गवाँ-गवाँ से जिता  लेकिन

सहर कै एकदम सरहनीय होइगय

वादा कै कय गय जनता से

अव चोरन कै गोपिनिय होइगय |

Mananiya is an Awadhi poem I wrote a few years back by looking towards the politicians how they are getting being elected just by using money and power.

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Ajay Pandey
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