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मननीय (अवधी )

January 20, 2018Ajay Pandey

देश कय अवस्था एकदम दयनीय होइगय

कल कय गुन्डा जब से मननीय होइगय

पढाल लिखल देखो सब भैँस चरवय

अव बिन पढ़ा सब कै सम्मनीय होइगय

जीवन  भर  अपराध  किहिस जउन

आज उहय सबसे पुजनीय होइगय

गवाँ-गवाँ से जिता  लेकिन

सहर कै एकदम सरहनीय होइगय

वादा कै कय गय जनता से

अव चोरन कै गोपिनिय होइगय |

Mananiya is an Awadhi poem I wrote a few years back by looking towards the politicians how they are getting being elected just by using money and power.

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कुटिया कै लक्ष्मी पुजा ( अवधी ) । अजय पाण्डेय

 

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