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उठ प्यारे चल जाग उठ

October 31, 2017Ajay Pandey

उठ प्यारे चल जाग उठ
क्यों बिचारण में है तू अमुख
जिसको तु समझें है सुख
वो तो है केवल मीठा दुःख
बन मधुमख्खी सा कर्म प्रमुख

क्यों स्वप्न में सदैब खोया रहेता
जीवनके मीठे झूठको सहेता
बन शून्य क्यों तु शून्य में डूबा भिक्छुक
तु ही तो है जो चीरे भूख

बन हथौड़ा तू शिला पर गिर
बन मूरत वह भी जाये खिल
तुझ में है वो अबिरल धरा
जिसके आगे गिरा जग सारा
बस सिख तु थोड़ा हाँ झुक

क्यों अधियारेको करे आलंगन
क्यों नदिखे है तुझको जन क्रंदन
कुर्शी क्यों इतनी प्यारी है
सुखकी पट्टी लगा तु मुर्ख
क्यों धरातलको भूले प्रमुख

This is one of my few poems which i have written in hindi language .

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